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लाभ- हानि – सेकेंडों में कीजिये हल

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सदैव याद रखें लाभ एवं हानि प्रतिशत सदैव क्रय मूल्य पर निकाले जाते है  लाभ = विक्रय मूल्य – क्रय मूल्य  हानि = क्रय मूल्य – विक्रय मूल्य 1. कोई व्यक्ति 10 रु. में 11 संतरा खरीद कर 11 रु. में 10 संतरा बेचता है उसे कितना % लाभ या हानि होता है 2- कोई बच्चा 16 रु. में 9 संतरा खरीदकर 20 रु. में 11 के हिसाब से बेच देता है उसे कितने प्रतिशत हानि या लाभ होगा 3- कोई बईमान दुकानदार सामान को क्रय मूल्य पर बेचने का दावा करता है 1 किलोग्राम के स्थान पर 960 ग्राम बेचता है उसे कितने % लाभ होगा 4- एक दुकनदार 10% लाभ लेकर चावल बेचता है एवं जिस बटखरे का प्रयोग करता है वह 20 % कम है कुल % लाभ क्या है 5- एक विक्रेता 1 किलोग्राम के बटखरे की जगह 840 ग्राम का बटखरा प्रयोग करता है उसका वास्तविक % लाभ या हानि ज्ञात करें 1 जब वह अपनी वस्तु को क्रय मूल्य पर 4% की हानि सहकर बेचता है 2- जब वह अपनी वस्तु को 4% लाभ लेकर बेचता है 6- यदि दो बैल में से प्रत्येक को 4575 रु. में बेचा गया हो तथा एक पर 15 % लाभ तथा दूसरे पर 15 % हानि बेचा जाये तो ...

संख्याओं के प्रकार

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संख्याएं: फार्मूला, ट्रिक और उदहारण संख्याओं को दर्शाने की कई प्रणालियाँ हैं। इन प्रणालियों में सबसे अधिक प्रचलित प्रणाली दाशमिक प्रणाली है जिसे हिन्दू-अरेबिक संख्याकन पद्धति भी कहते हैं। इस प्रणाली के अंतर्गत किसी संख्या को दर्शाने के लिए हम चिह्न/संकेतों (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 और 9) का उपयोग करते हैं जिन्हें अंक कहते हैं। इन्हीं दस अंकों का उपयोग हम किसी संख्या को दर्शाने के लिए करते हैं। संख्याओं के प्रकार प्राकृत संख्याएँ:  वस्तुओं को गिनने के लिए जिन संख्याओं का प्रयोग किया जाता है, उन संख्याओं को गणन संख्याएँ या प्राकृत ‘संख्याएँ’ कहते हैं। जैसे- 1, 2, 3, 4, 5, ……….. पूर्ण संख्याएँ:  प्राकृत संख्याओं में शून्य को सम्मिलित करने पर जो संख्याएँ प्राप्त होती हैं उन्हें ‘पूर्ण संख्याएँ’ कहते हैं। जैसे- 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 …………. पूर्णांक संख्याएँ:  प्राकृत संख्याओं में शून्य एवं ऋणात्मक संख्याओं को भी सम्मिलित करने पर जो संख्याएँ प्राप्त होती हैं, उन्हें ‘पूर्णांक संख्याएँ’ कहते हैं। जैसे- ……… -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, ……...