संख्याएं: फार्मूला, ट्रिक और उदहारण संख्याओं को दर्शाने की कई प्रणालियाँ हैं। इन प्रणालियों में सबसे अधिक प्रचलित प्रणाली दाशमिक प्रणाली है जिसे हिन्दू-अरेबिक संख्याकन पद्धति भी कहते हैं। इस प्रणाली के अंतर्गत किसी संख्या को दर्शाने के लिए हम चिह्न/संकेतों (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 और 9) का उपयोग करते हैं जिन्हें अंक कहते हैं। इन्हीं दस अंकों का उपयोग हम किसी संख्या को दर्शाने के लिए करते हैं। संख्याओं के प्रकार प्राकृत संख्याएँ: वस्तुओं को गिनने के लिए जिन संख्याओं का प्रयोग किया जाता है, उन संख्याओं को गणन संख्याएँ या प्राकृत ‘संख्याएँ’ कहते हैं। जैसे- 1, 2, 3, 4, 5, ……….. पूर्ण संख्याएँ: प्राकृत संख्याओं में शून्य को सम्मिलित करने पर जो संख्याएँ प्राप्त होती हैं उन्हें ‘पूर्ण संख्याएँ’ कहते हैं। जैसे- 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 …………. पूर्णांक संख्याएँ: प्राकृत संख्याओं में शून्य एवं ऋणात्मक संख्याओं को भी सम्मिलित करने पर जो संख्याएँ प्राप्त होती हैं, उन्हें ‘पूर्णांक संख्याएँ’ कहते हैं। जैसे- ……… -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, ……...
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